मंगाली का इतिहास
15 वी शताब्दी में ग़ाव में एक लड़की का जन्म हुआ | उस लड़की के जन्म से ही दो
दांत थे जिस कारण उस लड़की का नाम दन्तो रखा गया | दन्तो होने के कारण उसकी शादी
नही हो पा रही थी |
काफी समय बाद उसकी शादी चौधरीवास के एक व्यक्ति के साथ हुई जो पहले से
शादीसुदा था | शादी के बाद वे दोनों कुटियाँ रोड पर स्थित थेह (ऊँचा स्थान) पर
रहने लगे | उनके चार पुत्र हुए जिनका नाम सुरत, अकला, झारा व महोब्बत था | जो अब
मंगाली सुरतिया,मंगाली आकलन,मंगाली झारा और मंगाली महोब्बत के नाम से जाने जाते है
| उस व्यक्ति (दन्तो का पति) की पहली पत्नी का भी एक पुत्र था जिसका नाम सीवान था
जो की आज सिवानी के नाम से जाना जाता है |
कैसे पड़ा मंगाली नाम
ग़ाव नाम मंगाली पड़ने के
पीछे कई कहानी प्रचलीत है जैस कि ग़ाव के पास मंगलगड नामक एक शहर था जिसके नाम से
ग़ाव नाम मंगाली पड़ा बाद में मंगाली कहा जाने लगा |
ग़ाव के कुछ बुजर्गों के अनुसार होली के दिन होली
जलाते ( मंगलाते) समये ग़ाव में आग लग गई थी जिसे पूरा ग़ाव जल गया था | जिसके कारण
इस ग़ाव नाम मंगली या मंगाली पड़ गया |
Ram ram
ReplyDeleteयह एक बहुत अछी सुरुवात है गावं के सभी शिक्षित व्यक्तिओ को इस मे अपना सहयोग जरुरी है /
ReplyDeleteजी
ReplyDeleteमंगाली अकलान में सहीद स्मारक है उसकी हिस्ट्री मै आपको ला कर दूंगा
अजय बावल
Also read mangali.ml
ReplyDeletePlease lakar de
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